Text of Prime Minister Shri Narendra Modi’s address during the ceremony held to launch the ‘Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana’ (PMJDY)

इस कार्यक्रम को मैं अभी देख रहा था। बहुत सी चीजें मैं अलग तरीके से देख रहा था। आपने देखा होगा, जिन्‍होंने ईनाम प्राप्‍त किया है, उनमें से ज्‍यादातर अहिन्‍दी भाषी राज्‍य के लोग हैं और योजना का नाम उन्‍होंने हिन्‍दी में दिया है, देखिये ‘नेशनल इंटीग्रेशन’। दूसरा आपने देखा होगा कि जिनके खाते खोले गए हैं, जो कपल आए थे, सभी बहनें फेस्टिवल मूड के कपड़ों में थीं। क्‍योंकि उन्हे यह इतना बड़ा हक मिला है, उनको यह बराबर समझ है। उनको पता है कि बैंक का खाता खुलेगा, खुद आपरेट कर पाएंगे, पैसे वहां जमा होंगे, इससे उन्‍हें जीवन में कितनी बड़ी सुरक्षा मिलेगी। उसके लिए इससे बड़ा कोई फेस्टिवल मूड हो ही नहीं सकता है।

यह आज खुशी की बात है कि आज बहुत सारे रिकार्ड ब्रेक हो रहे हैं। शायद इंश्‍योरेंस कंपनी के इतिहास में एक ही दिन में डेढ़ करोड़ लोगों का अकस्‍मात बीमा, दुर्घटना बीमा, एक लाख रुपये प्रति व्‍यक्ति का, शायद इंश्‍योरेंस कंपनी के जनमत से आज तक कभी नहीं हुआ होगा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकार्ड है। बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में भी एक दिवस में डेढ़ करोड़ नागरिकों का खाता खुलना, यह शायद बैंकिंग इतिहास का एक बहुत बड़ा रिकार्ड होगा।

इससे सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि जो सरकार में बैठे हैं, भिन्‍न भिन्‍न विभागों में काम कर रहे हैं, उनका भी विश्‍वास प्रस्‍थापित होने वाला है। आज के बाद जो हम तय करें, वह हम कर सकते हैं और शासन चलता है, व्‍यवस्‍था में जुड़े हुए लोगों के विश्‍वास पर। उनको अपने पर विश्‍वास हो कि हां, यह कर सकते हैं। यह एक ऐसा अचीवमेंट है जो सिर्फ बैंकिंग सेक्‍टर को नहीं, शासन व्‍यवस्‍था में जुड़े हुए हर व्‍यक्ति के विश्‍वास को अनेक गुना बढ़ा देगा। और इस कारण भविष्‍य में जब भी कोई योजना पर, इस प्रकार का मिशन मोड में काम करना होगा तो हम बहुत आसानी से कर पाएंगे, यह विश्‍वास आज प्रस्‍थापित हुआ है।

भारत सरकार की परंपरा में भी शायद एक साथ 77000 स्‍थान पर साइमलटेनियस कार्यक्रम एक साथ होना, इस प्रकार से कि व्‍यवस्‍था को विशिष्‍ट कार्य के लिए आर्गनाइज करना, एक साथ सभी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को लेकर इतना बड़ा कार्यक्रम करना, ये भी अपने आप में भारत सरकार के लिए एक पहला अनुभव है। वरना सरकुलर जाते हैं, मीटिंग होती है, फिर जानकारी आती है तब तक कि अच्‍छा नहीं हुआ, तो ठीक है, यह नहीं हुआ। इन सारी परंपराओं से हटकर इतना बड़ा अचीव करना, यह सरकार के लिए, सरकारी व्‍यवस्‍था के लिए, एक सुखद अनुभव है। और यह बात सही है कि सफलता नई सिद्धियों को पाने की प्रेरणा बन जाती है। सफलता नई सिद्धियों का गर्भाधान करती है। और ये सफलता देश को आगे ले जाने के अनेक जो प्रकल्‍प हैं, उसको एक नई ताकत देगी। यह आज के इस अवसर से मुझे लग रहा है।

इसको सफल करने वाले वित्‍त विभाग के सभी बंधु, सरकार के सभी बंधु, बैंकिंग क्षेत्र के सभी लोग, सभी राज्‍य सरकारें, ये सब अभिनंदन के अधिकारी हैं और हम सब मिल कर के किसी एक लक्ष्‍य को पाना चाहें तो कितनी आसानी से पा सकते हैं, यह हमें ध्‍यान में आता है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, 1969 में जब बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, राष्‍ट्रीयकरण किया गया, तब कैसे कैसे सपने बोये गए थे। उस समय के सारे विधान निकालिये, सारे बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण गरीबों के लिए होता है, पूरे देश के गले उतार दिया गया था। लेकिन आजादी के 68 वर्ष के बाद, 68 प्रतिशत लोगों के पास भी अर्थव्‍यवस्‍था के इस हिस्‍सा से कोई संबंध नहीं है और इसलिए लगता है कि जिस मकसद से इस काम का प्रारंभ हुआ था, वह वहीं की वहीं रह गई। मैं यह मानता हूं कि जब कोई व्‍यक्ति बैंक में खाता खोलता है, तो अर्थव्‍यवस्‍था की जो एक मुख्‍य धारा है, उस धारा से जुड़ने का पहला कदम बन जाता है।

आज डेढ़ करोड़ परिवार या व्‍यक्ति, जो भी जुड़े हैं, वे अर्थव्‍यवस्‍था की मुख्‍यधारा में अपना पहला कदम रख रहे हैं। यह अपने आप में देश की आर्थिक व्‍यवस्‍था को गति देने के लिए एक महत्‍वपूर्ण सफलता है। आजादी के इतने साल के बाद और जो देश के गरीबों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, और गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अर्थव्‍यवस्‍था सबसे महत्‍वपूर्ण इकाई होती है। अगर उससे वह अछूत रह जाए, मुझे यह शब्‍द प्रयोग करना अच्‍छा तो नहीं लगता, पर मन करता है कि कहूं यह फाइनेंसियल अनटचेबिलिटी है। देश के 40 प्रतिशत लोग, जो भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के हकदार नहीं बन पाते, उसके लाभार्थी नहीं बन पाते, तो हम फिर गरीबी को हटाने के काम में सफल कैसे हो सकते हैं।

इसलिए हमारा मकसद है, अगर महात्‍मा गांधी ने सामाजिक छुआछूत को मिटाने का प्रयास किया, हमें गरीबी से मुक्ति पानी है, तो हमें फाइनेंसियल अनटचेबिलिटी से भी मुक्ति पानी होगी। हर व्‍यक्ति को भी फाइनेंसियल व्‍यवस्‍था से जोड़ना होगा और उसी के तहत इस अभियान को पूरी ताकत के साथ उठाया है।

आज भी गांव के गरीब परिवारों में जब जाते हैं तो देखते हैं, कि माताएं-बहनें बहुत मेहनत करके पैसे बचाती हैं। लेकिन उसको हर बार परेशानी रहती है, अगर पति को बुरी आदतें लगी हैं, व्‍यसन की आदत लग गई है। तो उस महिला को चिंता लगी रहती है कि शाम को पैसे कहां छुपायें, कहां रखें, बिस्‍तर के नीचे रखें, वह ढ़ूंढ के निकाल लेता है। लेकर के बैठ जाता है, उसको नशे की आदत लगी है। जब खाता खुल जाएगा तो महिलाओं का कितना आशीर्वाद मिलेगा हमलोगों को। इसलिए बैंकिंग सेक्‍टर के जिन महानुभावों ने इस काम को किया है, आपने 20 साल की नौकरी की होगी, 25 साल की नौकरी की होगी, आपने बड़े-बड़े मल्‍टी मिलेनियर के खाते खोले होंगे, उनको पैसे दिये होंगे, लेकिन आशीर्वाद पाने की घटना आज हुई है। वह महिला जब खाता खोलेगी, आपको आशीर्वाद देगी और आपके जीवन में सफलता प्राप्‍त होगी। यह छोटा काम नहीं किया है आपलोगों ने। यह एक ऐसा काम किया है, जिसमें लाखों लोगों, लाखों गरीब माताओं का आशीर्वाद आपको मिलने वाला है।

ये कैसी व्‍यवस्‍था हमने विकसित की है, मैं किसी को दोष नहीं देता हूं, मैं आत्‍मचिंतन कर रहा हूं। ये कैसी व्‍यवस्‍था हमने विकसित की है, कि इस देश का अमीर व्‍यक्ति कम से कम ब्‍याज पर धन पा सकता है। बैंक उसके बिजनेस हाउस पर जा करके, कतार लगा करके खड़ी होती है कि आप हमारे साथ बिजनेस कीजिए। बिजनेस के लिए यह आवश्‍यक होगा। वह कोई गलत करते हैं, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं, लेकिन यही स्थिति है और जो गरीब हैं, जिनको कम से कम ब्‍याज पर पैसा मिलना चाहिए, वह अमीर से पांच गुना ब्‍याज पर पैसे लेता है। उस साहूकार से पैसे लेता है, और उसके कारण उसका शोषण भी होता है, एक्‍सप्‍लाइटेशन होता है। हर प्रकार से उसके जीवन में संकट पैदा होने के कारण संकट की शुरूआत हो जाती है। एक बार साहूकार से वह पैसे लिया तो कभी वह उसके चंगुल से मुक्‍त नहीं हो पा रहा है। कर्ज में डूबा हुआ वह व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या की ओर चला जाता है। परिवार तबाह हो जाता है। क्‍या, इस देश की इतनी बड़ी बैंकिंग व्‍यवस्‍था, इतनी बडी फाइनेंसियल सिस्‍टम, उसका दायित्‍व नहीं है, इस दुष्‍चक्र से गरीबों को मुक्ति दिलाये? 

आज गरीबों की दुष्चक्र से मुक्ति का, आजादी का, मैं पर्व मना रहा हूं। 15 अगस्‍त को जिस योजना की घोषणा की, 15 दिन के भीतर भीतर योजना को लागू किया, और आज डेढ़ करोड़ परिवारों तक पहुंचने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। आगे चल कर के उसकी विश्‍वसनीयता बनेगी, बैंकिंग व्‍यवस्‍था में विश्‍वसनीयता बनेगी। उसके कारण बैंकिंग सेक्‍टर भी एक्‍सटेंड होने वाला है। कई नई ब्रांच खुलेगी। कई उसके नए एजेंट तय होंगे। लाखों नौजवानों को इसके कारण रोजगार मिलने वाला है। इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने के लिए स्‍थायी व्‍यवस्‍था विकसित होगी। 2000 से ऊपर की जनसंख्‍या वाले जितने गांव हैं, वहां कोई न कोई बैंकिंग दृष्टि से काम आएगा। इवन पोस्‍टआफिस, आज ईमेल के जमाने में, एसएमएस के जमाने में, पोस्‍टल विभाग की गतिविधियां कम हुई है, लेकिन उसकी व्‍यवस्‍थाएं तो वैसी की वैसी हैं। उन व्‍यवस्‍थाओं का उपयोग बैकिंग सेक्‍टर के लिए किया जाएगा। इन गरीबों के लिए किया जाएगा। तो उसके कारण अपने आप ऐसी व्‍यवस्‍थाएं मिलेंगी, जिन व्‍यवस्‍थाओं के कारण गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ने के लिए बहुत बड़ी ताकत मिलने वाली है और हम सब मिल कर के, गरीबी के खिलाफ लड़ते हैं तो गरीबी से मुक्ति मिल सकती है। यह मेरा पूरा विश्‍वास है।

हम हमेशा कहते हैं, कि भाई सरकार हो, सरकार की संपत्ति हो, वह गरीबों के लिए है। लेकिन आज वह शब्‍दों में नहीं, वह हकीकत में परिवर्तित हो रहा है। उसके कारण आगे चल कर के बैंक से उसको 5000 रुपये तक का कर्ज मिलेगा।सामान्‍य मानव को इससे ज्‍यादा कर्ज की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है। उसको अपनेaass रोजमर्रा के काम के लिए चाहिए और अनुभव यह है, गरीब व्‍यक्ति जो बैंक के अंदर आता है, 99 प्रतिशत वह समय से पहले पैसे जमा कराता है। वह बेचारा हमेशा डरता रहता है। उसमें यदि बहनों के पास हो तो वह 100 प्रतिशत पेमेंट पहले कर देती हैं। ये बैंकिंग सेक्‍टर के लोगों का अनुभव है और बड़े-बड़े लोग । हमें मालूम है, क्‍या होता है और इसलिए यह सारा प्रयास गरीबों के लिए है। गरीबी से मुक्ति चाहने वालों के लिए एक अभियान का हिस्‍सा है। और उसी के लिए उसको आगे बढाया जा रहा है।

किसी काम को जब तब समय सीमा में बांध कर निर्धारित लक्ष्‍य को पाने का प्रयास नहीं किया जाए, और पूरी शक्ति से उसमें झोंक न दिया जाए, तो परिणाम नहीं मिलते और एक बार ब्रेक थ्रू हो जाए तो गाड़ी अपने आप चलने लग जाती है। आज के इस ब्रेक थ्रू के बाद मैं नहीं मानता हूं कि यह रूकने वाला है। शुरू में जैसे वित्‍त मंत्री जी कहते थे, 2015 अगस्‍त तक का समय चल रहा था। मैंने कहा, भाई इस झंडावंदन से अगले झंडावंदन तक में हमको काम करना है। 15 अगस्‍त को झंडावंदन किया और योजना घोषित की। 26 जनवारी तक इसे पूरा करें हम। 15 अगस्‍त 2015 तक क्‍यों इंतजार करें। और मैं वित्‍त विभाग का आभारी हूं, इस डिपार्टमेंट के सभी अधिकारियों का आभारी हूं, बैंकिंग सेक्‍टर का आभारी हूं कि उन्‍होंने बीड़ा उठा लिया है और उन्‍होंने मुझे वादा किया है कि हम जनवरी 26 पहले इस काम को पूरा कर लेंगे।

आज जो रुपे में जो क्रेडिट कार्ड मिल रहा है इन डेढ़ करोड़ लोगों को, हम दुनिया के जो पोपुलर वीजा कार्ड वगैरह हैं, उससे परिचित हैं, जो विश्‍व में चलता है। क्‍या हम लोगों के इरादा नहीं होना चाहिए क्‍या कि हमारा रूपे कार्ड दुनिया के किसी भी देश में चल सके, इतनी ताकत हमारी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? उसकी इतनी क्रेडिबिलिटी होनी चाहिए। होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? आज से इस इवेंट के बाद उसकी पूरी संभावना पैदा होगी। इस देश के डेढ़ करोड़ लोग होंगे, जैसे अमीर लोग कई बड़े रेस्‍टोंरेंट में जाते हैं, तो खाना खाते हैं तो अपना कार्ड देते हैं ओर वो कार्ड में से डेबिट होता है। अब मेरे गरीब के पास भी वो कार्ड होगा। वह भी अपना डेबिट करवाएगा, कोई सब्‍जी बेचता होगा। देखिए अमीर और गरीब की खाई भरने का कितना बड़ा इनीशिएटिव है ये। आज गरीब आदमी भी अपने हाथ में भी मोबाइल होता है तो वो दूसरे के बराबर, अपने को समझता है। उसके पास भी मोबाइल और मेरे पास भी मोबाइल है। अब वो, उसके पास भी कार्ड है और मेरे पास भी कार्ड है, इस मिजाज से काम करेगा। एक मनोवै‍ज्ञानिक परिवर्तन इससे आता है। आखिरकर मानसिक रूप से पक्‍का कर ले, हां मैं किसी की भी बराबरी कर सकता हूं, आगे बढ़ने में कोई रोक नहीं सकता इसको। वो आगे बढ सकता है। इसलिए स्‍पेशल स्‍कीम और भी जोड़ रहे हैं हम आज। हम 26 जनवरी तक, जिसमें आज जो डेढ़ करोड़ लोगों ने किया है, उनका भी समावेश होगा, 26 जनवरी तक जो लोग अपने खाते खुलवाएंगे, उनको एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा के अलावा 30 हजार रुपये का लाइफ इंश्‍योरेंस भी मिलेगा। जो परिवार में कोई बीमार हुआ , कोई जरूरत पड़ी तो उनको काम आएगा। 26 जनवरी तक ये लाभ मिलेगा। गरीब परिवार को एक लाख रुपये की व्‍यवस्‍था, किसी भी गरीब के लिए काम आएगी। उसके परिवार के लोगों को काम आएगी। कभी कभी ये बहुत से बातें, बड़े लोगों को समझ नहीं आती हैं, लेकिन सामान्‍य मानव तेजी से पकड़ता है।

जब 15 अगस्‍त को लाल किले से मैंने एक बात को कहा तो दूसरे दिन ज्‍यादा उसकी चर्चा सुनी नहीं। शाम में टीवी डिबेट में भी उसको सुना नहीं। लेकिन मुझे एक दो सज्‍जन मिलने आए तो उन्‍होंने कहा कि मेरा ड्राइवर बहुत खुश है, मैंने कहा क्‍यों, उसने कहा मोदी जी ने एक लाख रुपये का इंश्‍योरेंस दे दिया। गरीब आदमी को चीजों की कितनी समझ है, कितनी तेजी से वह चीजों को पकड़ता है, उसका एक उदाहरण है। विधिवेत्‍ताओं को शायद पता नहीं होगा एक लाख का इंश्‍योरेंस दिया गया है वह बहुत बड़ी योजना है। हिन्‍दुस्‍तान के एक ड्राइवर, एक गरीब आदमी को पता है, उसके भाग्‍य को बदलने की शुरूआत 15 अगस्‍त को तिरंगा झंडा फहराने के साथ हुई है, यह बात उस तक पहुंच गई है। यह ही चीजें हैं जो कि बदलाव लाती है। और बदलाव लाने की दिशा में हमारा प्रयास है।

हमारे यहां शास्‍त्रों में ऐसा कहा गया है सुखस्‍य मूलम धर्म, धर्मस्‍य मूलम अर्थ, अर्थस्‍य मूलम राज्‍यम। यानी सुख के मूल में धर्म यानी आचरण, लेकिन धर्म के मूल में आर्थिक, इकोनोमिकल स्‍टेबिलिटी है। इकोनोमिकल स्‍टेबिलिटी के मूल में राज्‍य का दायित्‍व है। यह राज्‍य की ज़िम्मेवारी है, फाइनेंसियल इंक्‍लूजन की। यह चाणक्‍य से भी पहले हमारे पूर्वजों ने कहा हुआ है और इस लिए राज्‍य अपना दायित्‍व निभाने का प्रयास कर रहा है कि जिसमें सामान्‍य व्‍यक्ति की भी अब आर्थिक स्थिति सामान्‍य होगी तो उसके जीवन के अंदर सुख और संतोष की स्थिति तक वह पहुंच जाएगा। इसलिए अब हमलोगों का प्रयास है और मैं मानता हूं कि आज जो योजना का आरंभ हुआ है, नौजवानों को रोजगार की संभावनाएं बढ़ने वाली है। गरीब आदमी के हाथ में पैसा आएगा, बचेगा अपने आप में।

जैसा वित्‍त मंत्री जी कहते थे, आने वाले दिनों में जो इंडिविजुअल स्‍कीम्‍स है उसका सीधा सीधा लाभ इन बैंक अकाउंट में जाएगा तो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो लड़ाई है, उसमें एक बहुत बड़ा उपयोगी शस्‍त्र बनने वाला है। जो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ भी लड़ने की ताकत देगा। बैंक में खाता, वैसे हमारे खास करके हिन्‍दुस्‍तान और ज्‍यादातर एशियन कंट्रीज में, सदियों से हम लोगों का एक स्‍वभाव रहा है, हमारे संस्‍कार रहे हैं, वह संस्‍कार है, बचत । दुनिया के बाकी देशों में यह प्रकृति नहीं है। वहां तो ऋणम कृत्‍वा, घृतम पीवेत, कर्ज कर के घी पीओ। अब वो घी पीते नहीं, जो पीतें हैं वह पीते हैं। लेकिन ये फिलोस्‍फी गलत है। हमारे यहां परंपरा रही है, सेविंग की। और हमारे देश की ऐसी विशेषता खास एशियन कंट्रीज की ऐसी रही है। कि अपना ही सोचना ऐसा नहीं है, अपने बच्‍चों का भी सोचना, आने वाली पीढ़़ी का सोचना, यह हमारी सदियों क परंपरा रही है। ऐसा नहीं कर्ज करो और जियो बाद में, जो आएगा वह भुगतेगा, वह करेगा। क्रेडिट कार्ड के भरोसे जीने वाले हमलोग नहीं हैं। स्‍वभाव से सेविंग हमारी प्रकृति रही है, और उसके कारण बैंकिंग व्‍यवस्‍था अपने आप में एक लाभ है।

लेकिन बैंकों की स्थिति क्‍या है, मैं अपने जीवन की एक घटना सुनाना चाहता हूं। मैं मेरे गांव मे स्‍कूल में पढ़ता था, और देना बैंक के लोग हमारे स्‍कूल में आए थे। तो देना बैंक के लोग वो कोई मिस्‍टर वोरा करके थे। मुझे इतना याद है कि सबको समझा रहे थे, गुल्‍लक देते थे, पैसा बचाना चाहिए, बच्‍चों को पैसा बचाना चाहिए वगैरह वगैरह। खाता खोलते थे, हमने भी खुलवा दिया था, हमको भी एक गुल्‍लक मिला था। लेकिन हमारा गुल्‍लक में कभी एक रुपया पड़ा नहीं। क्‍योंकि हमारा वह बैकग्रांउड नहीं था कि हम वो कर पायें। अब खाता तो खुल गया, हम स्‍कूल छोड़ दिया, हम गांव छोड़ दिया, हम बाहर भटकने चले गए, तो बैंक वाले मुझे खोज रहे थे। शायद उन्‍होंने मुझे 20 साल तक खोजा, कहां हैं ये। और क्‍यों खोज रहे थे, खाता बंद करवाने के लिए। वह बोले भई, हर साल तुम्‍हारे खाते को कैरी फारवर्ड करना पड़ता है। कागजी कार्रवाई इतनी करनी पड़ रही है, तुम मुक्ति दो हमको। बाद में बताया गया कि मुझे खोजा जा रहा है, तो मैंने बाद में उन्‍हें मुक्ति दे दी।

तो वह एक समय था जब खाता बंद करवाने के लिए भी कोशिश की जाती थी। आज खाता खोलने के लिए कोशिश हो रही है। मैं मानता हूं, यहीं से, यहीं से गरीबों की जिंदगी के सूर्योदय का आरंभ होता है। मैं इस काम को करने वाले बैंकिंग सेक्‍टर के लोगों को बधाई देता हूं। और आज, मैंने एक चिट्ठी लिखी थी, करीब सात लाख लोगों को अभी मैंने एक ईमेल भेजा था, शायद यह भी किसी प्रधानमंत्री को यह काम पहली बार करने का सौभाग्‍य मिला होगा। बैंक के सभी व्‍यक्तियों को यह चिट्ठी गई है और मैंने इनसे आग्रह किया है कि यह बहुत बड़ा पवित्र और सेवा का काम है। इसको हमने करना है और सबने इसको किया।

इस बात को जिस प्रकार से बैंकिग सेक्‍टर के प्रत्‍यक्ष कार्य करने वाले लोगों ने उठा लिया है, मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं और मैं आशा करता हूं कि हमें 26 जनवरी तक इंतजार नहीं करना पड़े और 26 जनवरी से पहले हम लक्ष्‍य को प्राप्‍त करें, और देश में जो आर्थिक छुआछूत का जो एक माहौल है उससे मुक्ति दिलायें और ब्याज के दुष्‍चक्र की वजह से आत्‍महत्‍या की ओर जा रहे उन परिवारों को बचायें और उनके जीवन में भी सुख का सूरज निकले, इसके लिए प्रयास करें।

इसी अपेक्षा के साथ सबको बहुत बहुत धन्‍यवाद, सबको बहुत बहुत शुभकामनाएं।

Article source: http://www.narendramodi.in/text-of-prime-minister-shri-narendra-modis-address-during-the-ceremony-held-to-launch-the-pradhan-mantri-jan-dhan-yojana-pmjdy/

PM pays tribute to legendary hockey player Dhyan Chand; congratulates award-winning sportspersons

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, has paid tribute to the legendary hockey player, Major Dhyan Chand, on National Sports Day. 

“Our tributes to the legendary Major Dhyan Chand on National Sports Day. His determination dedication towards sports continues to inspire. We salute all our sportsmen women who have been enhancing the pride of the Tricolour by their exemplary performance on the field. Congrats to the sportspersons who would be honoured with the various National Sports Awards today. India is proud of them,” the Prime Minister said.

Article source: http://www.narendramodi.in/pm-pays-tribute-to-legendary-hockey-player-dhyan-chand-congratulates-award-winning-sportspersons/

PM’s Departure Statement ahead of his visit to Japan

I am keenly looking forward to my three-day visit to Japan at the invitation of my good friend, Prime Minister Shinzo Abe, for the Annual Summit between India and Japan. 

This will be my first bilateral visit outside India’s immediate neighbourhood as Prime Minister of India, which underlines the high priority that Japan receives in our foreign and economic policies. It is also a reflection of Japan’s paramount importance in my vision for development and prosperity in India and in peace, stability and prosperity in Asia at large. 

Japan is one of our closest partners in political, economic, security and cultural realms. It is a key regional and global partner for us. Between our countries, there is only goodwill and mutual admiration. Buddhism from India has inspired Japan for over a millennium. We in India similarly draw inspiration from Japan’s vanguard role as the fountainhead of Asia’s modernization, resurgence and rejuvenation. The people in India are grateful for the seminal contribution made by Japan’s generous ODA over the years to India’s economic, social and infrastructure development. 

I will begin my visit from Japan’s old capital Kyoto, which is rich in heritage of our civilizations. I am deeply grateful to Prime Minister Abe for joining me there, which demonstrates a special commitment and support for the relationship. My visit to Kyoto reflects the ancient foundations of our contemporary relations and will also focus on some of our nation’s priorities, including urban renewal and smart heritage cities as well as advanced scientific research. 

From there, I will proceed to Tokyo, where I hope to discuss with Prime Minister Abe the roadmap for our global and strategic partnership in the years ahead. 

During this visit, I propose to celebrate these links of history and the experiences of our peoples, and impart new meaning to them. We will explore how Japan can associate itself productively with my vision of inclusive development in India, including the transformation of India’s manufacturing, infrastructure sectors, energy and social sectors. We will discuss how to boost our defence and security cooperation, including in defence technology, equipment and industry, in line with the evolving domestic policies of the two countries. I will try to accelerate progress on the unfinished agenda of projects and initiatives that our two countries have embarked upon. 

I am meeting Prime Minister Abe at a time of enormous global challenges, from persisting economic weaknesses to turmoil and transitions in different parts of the world. I hope to exchange views with Prime Minister Abe on important regional and global developments of shared interest. 

I look forward to an audience with His Majesty the Emperor of Japan, who graced the people of India with a most memorable visit to our country last year. I will have an opportunity to interact with leaders across the entire political spectrum in Japan, regional leaders, captains of business and industry, friends of India in Japan as well as Indian brothers and sisters living and working in Japan. 

I am confident that my visit will write a new chapter in the annals of the relations between Asia’s two oldest democracies and take our Strategic and Global Partnership to the next higher level. 

Article source: http://www.narendramodi.in/pms-departure-statement-ahead-of-his-visit-to-japan/

PM greets people on the occasion of Samvatsari

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, has greeted the people on the occasion of Samvatsari. 

“Greetings on the occasion of Samvatsari. Let forgiveness and peace prevail over darkness, violence anger. Michhami Dukkadam. May the power of compassion and forgiveness further kindle the spirit of unity in our society,” the Prime Minister said. 

Article source: http://www.narendramodi.in/pm-greets-people-on-the-occasion-of-samvatsari/

“Excited to meet PM Shinzo Abe”: PM tweets in Japanese for the first time

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, has tweeted in Japanese for the first time, to talk to the people of Japan directly in Japanese. A team of Japanese volunteers helped with the translation. Following is the English translation of the tweets: 

“On 30th August I will begin my visit to Japan. I am keenly looking forward to the visit, which will boost relations between our two nations. 

Japan visit will be my 1st bilateral visit outside the subcontinent. I was to visit in early July but could not due to Parliament session. 

I see the Japan visit as an opportunity to take our ties with Japan to a new level and increase cooperation in various fields. 

I will visit Tokyo Kyoto and will interact with all sections of Japanese society from students, political leaders to captains of industry. 

Have very warm memories of visiting Japan as a CM. The hospitality the immense scope for cooperation left a deep impression in my mind. 

The scale of innovation level of precision among the people of Japan is admirable. Both our nations can learn a lot from each other. 

Am particularly excited to meet PM Abe. I deeply respect his leadership enjoy a warm relationship with him from previous meetings. 

Japan’s friendship with India is time tested. We are two vibrant democracies committed to advancing peace and prosperity in the world.” 

Article source: http://www.narendramodi.in/excited-to-meet-pm-shinzo-abe-pm-tweets-in-japanese-for-the-first-time/

PM launches Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today declared the beginning of the end of financial untouchability in India, with the opening of an estimated 1.5 crore bank accounts across the country, in an exercise unprecedented in scale in economic history. 

Formally launching the Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana (PMJDY) at a function broadcast across the nation from Vigyan Bhawan in New Delhi, the Prime Minister described the occasion as a festival to celebrate the liberation of the poor from a poisonous cycle. (Vish-chakra se gareebon ki aazaadi ka parv)

Expressing satisfaction at a number of records being broken today, the Prime Minister said the nationwide success of the enrolment drive today would give confidence not just to the officials of the Department of Financial Services and banking sectors, but also to officers across the Union Government, that they can successfully achieve the goals that they set for themselves. “Never before would insurance companies have issued 1.5 lakh accident insurance policies in a single day. Never before in economic history would 1.5 lakh bank accounts have been opened in a single day. Never before has the Government of India organized a programme of such scale – over 77,000 locations – with the participation of so many Chief Ministers, Union Ministers, Government and bank officials.” He said the success is an inspiration for achieving new heights. 

The Prime Minister said that though the initial target of PMJDY was to open bank accounts for 7.5 crore families in one year, he had exhorted the concerned officials to complete the task before the next Republic Day. 

Elaborating the benefits under PMJDY, the Prime Minister said this was not a mere bank account, but had other benefits including an RuPay debit card, Rs 1 lakh accident insurance cover, and an additional Rs. 30,000/- life insurance cover for those opening bank accounts before January 26th, 2015. He said the account performance would be monitored and overdraft facility would be given. The Prime Minister said he had sent 7.25 lakh bank employees, exhorting them to help reach the target of 7.5 crore bank accounts, and bring freedom from financial untouchability.

The Prime Minister referred to the five beneficiary couples who had received account opening kits in today’s event at Vigyan Bhawan, and said the ladies appeared to have dressed for a festival. He said they knew that there could be no bigger festival than the opening of a bank account for empowering women. 

The Prime Minister said when banks were nationalized in 1969, it was done with the objective of bringing people into the economic mainstream. But that objective had not been achieved till date. After 68 years of independence, not even 68% of India’s population had access to banking, he added. He said it is easy for the rich to get a loan at low interest rates. But the poor are forced to seek loans from money-lenders at five times the rate charged to the rich. Is it not the responsibility of the banking industry to provide banking access to the poor, the Prime Minister asked. 

The Prime Minister illustrated his point through the example of a mother saving money and being forced to hide it somewhere within the house. He said the bank officials who had opened an account for such a mother, had been blessed today.

He said a breakthrough was required to overcome the vicious cycle of poverty and debt, and that breakthrough had been achieved today. He said there were similarities between the poor getting access to mobile telephones, and getting access to debit cards. They both had the effect of instilling confidence and pride among the poor, he added. 

The Prime Minister referred to the ancient Sanskrit verse: Sukhasya Moolam Dharma, Dharmasya Moolam Artha, Arthasya Moolam Rajyam – which puts the onus on the state to involve people in economic activity. “This Government has accepted this responsibility,” the Prime Minister said.

The Prime Minister said Indians had a habit of saving, and thinking about the future of their children. 

The Prime Minister also distributed awards to winners of the Name and Logo contest for this scheme. He observed that those who won prizes were predominantly from non-Hindi speaking states, but had won prizes for coining a name and slogan in Hindi. This is an example of national integration, he said. 

Speaking on the occasion, the Finance Minister said PMJDY would be taken forward in Mission Mode, and the first target of reaching 7.5 crore unbanked families would be achieved by January 26th, 2015.

The Minister of State for Finance, Smt. Nirmala Sitharaman, said the lady of the house had been given priority in the PMJDY. She said this scheme would touch the lives of everyone in a positive and constructive way.

Article source: http://www.narendramodi.in/pm-launches-pradhan-mantri-jan-dhan-yojana/